आगरा। पं. रघुनाथ तलेगांवकर फ़ाउंडेशन ट्रस्ट एवं संगीत कला केंद्र, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ तथा सामुदायिक रेडियो 90.4 “आगरा की आवाज़” (डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा) के सहयोग से आयोजित द्वि-दिवसीय 61वें निनाद महोत्सव का भव्य शुभारंभ आज जे.पी. सभागार, खंदारी परिसर में हुआ। महोत्सव का उद्घाटन डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो. आशु रानी और सरदार प्रीतम सिंह (मुख्य प्रबंध नियासी, गुरुद्वारा गुरु का ताल) ने किया।
उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. अर्चना सिंह, पूजा सक्सेना और तरुण श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान स्मारिका का विमोचन भी सभी अतिथियों द्वारा किया गया।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा, “संगीत ईश्वर से जुड़ने और उन्हें प्राप्त करने का एक सशक्त साधन है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की जड़ें और अधिक सुदृढ़ होती हैं।” उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4 ‘आगरा की आवाज़’ को इस प्रतिष्ठित आयोजन का सहभागी बनने पर बधाई दी और कहा कि यह रेडियो केंद्र लंबे समय से भारतीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं एवं सामाजिक सरोकारों को जन-जन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
सरदार प्रीतम सिंह ने अपने संबोधन में रागों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कीर्तन में प्रत्येक शब्द रागों से सुसज्जित होता है, जिससे आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत कला केंद्र के संगीत साधकों द्वारा पं. रघुनाथ तलेगांवकर की स्वरचित सरस्वती वंदना “शक्ति भक्ति युक्ति दे माता सरस्वती”, विष्णु स्तवन तथा “स्वरमयी निनाद आया” की सजीव प्रस्तुति से हुआ, जिसे गुरु प्रतिभा तलेगांवकर के निर्देशन में प्रस्तुत किया गया।
प्रथम सत्र में पुणे से पधारी राम रंग परंपरा एवं मेवाती घराने की प्रतिनिधि कलाकार डॉ. विलीना पात्रा ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। राग का स्पष्ट चलन, खनकदार आवाज़ और सधी हुई तानों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संवादिनी पर पं. रविन्द्र तलेगांवकर और तबले पर युवा कलाकार श्रुति शील उद्धव की संगति सराहनीय रही। इस अवसर पर डॉ. विलीना पात्रा को “संगीत कला गौरव” सम्मान प्रदान किया गया।
प्रथम दिवस की अंतिम प्रस्तुति में झारखंड से पधारे मैहर घराने के प्रमुख कलाकार केडिया बंधु — पं. मोर मुकुट और मनोज कुमार द्वारा सितार–सरोद की युगलबंदी प्रस्तुत की गई। आलाप, जोड़, झाला और क्रमबद्ध राग प्रस्तुति श्रोताओं के लिए विशेष आकर्षण रही। तबले पर जयपुर से पधारे अकबर खान की संगति ने प्रस्तुति को ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। दोनों कलाकारों को पं. केशव तलेगांवकर की स्मृति में स्थापित “संगीत नक्षत्र” उपाधि से सम्मानित किया गया।
द्वितीय दिवस का कार्यक्रम:
महोत्सव के द्वितीय दिवस प्रातःकालीन नाद साधना सभा, श्री राजेश राय डंग को समर्पित, में वाराणसी के राम रंग परंपरा के प्रमुख कलाकार डॉ. रामशंकर शास्त्रीय गायन और जयपुर के तबला वादक अकबर हुसैन का एकल वादन होगा।
सायंकालीन समापन सत्र, गुरु एम. एल. कौसर को समर्पित, में भोपाल के प्रसिद्ध वायलिन वादक पं. प्रवीण शेवलीकर का वायलिन वादन और चंडीगढ़ की सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना डॉ. समीरा कौसर का कथक नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 61वें निनाद महोत्सव के अंतर्गत देश के छह प्रांतों से पधारे प्रतिष्ठित संगीत मनीषी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे आगरा नगरी भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र बनी हुई है।
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