मथुरा जंक्शन : आगरा मंडल में मथुरा जंक्शन पर 10 दिसंबर को एनडीआरएफ और रेलवे की संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। यह अभ्यास मंडल रेल प्रबंधक गगन गोयल के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें 8वीं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) गाजियाबाद की टीम और रेलवे के विभिन्न विभागों ने भाग लिया।
मॉक ड्रिल में रेलवे के परिचालन, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, इंजीनियरिंग, मेडिकल, सिविल डिफेंस, स्काउट एंड गाइड, एआरटी/आगरा, एआरएमवी/आगरा के साथ मथुरा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा विभाग ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।
इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई कर अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना और नुकसान को कम करना था।
ड्रिल के दौरान अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रा) प्रनव कुमार, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी आफताब अहमद, डिप्टी कमांडेंट एनडीआरएफ रविन्द्र कुमार सहित जिला प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि एनडीआरएफ प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान बचाव, राहत और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित विशेष बल है, जो बाढ़, भूकंप, आग, रासायनिक दुर्घटनाओं जैसी स्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ड्रिल का परिदृश्य
सुबह 10:49 बजे मथुरा जंक्शन पर सूचना प्रसारित हुई कि झांसी-अमृतसर स्पेशल एक्सप्रेस (03155) का अवपथन हो गया है और एक कोच में आग लग गई है। सूचना मिलते ही रेलवे, पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। रेलवे और अग्निशमन कर्मियों ने मिलकर आग पर तुरंत काबू पाया।
एनडीआरएफ की टीम ने कोच की खिड़की और छत को काटकर घायल और बेहोश यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। रोपवे की मदद से यात्रियों को बाहर निकालकर एआरएमवी/आगरा मेडिकल टीम व जिला प्रशासन की चिकित्सा टीम को सौंपा गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर यात्रियों को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
ड्रिल में टिकट निरीक्षक, ट्रेन मैनेजर, लोको पायलट, कोच अटेंडेंट, एसी मैकेनिक, स्टेशन स्टाफ और अन्य रेल कर्मचारियों की भूमिका का अभ्यास भी शामिल था।
दोपहर 13:42 बजे अधिकारियों ने बताया कि यह वास्तविक दुर्घटना नहीं बल्कि संयुक्त मॉक ड्रिल थी।
इस अभ्यास में एनडीआरएफ गाजियाबाद की टीम का नेतृत्व डिप्टी कमांडेंट रविन्द्र कुमार ने किया। लगभग 35 एनडीआरएफ कर्मियों ने इसमें हिस्सा लिया। संयुक्त प्रयास में रेलवे और जिला प्रशासन की टीमों का समन्वय प्रभावी रहा।
जन संपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि आपात स्थिति में स्थानीय संसाधन और तेजी से की गई कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस तरह की मॉक ड्रिल प्रशासन और रेलवे की तैयारी को मजबूत बनाती है। संयुक्त अभ्यास में रेलवे, एनडीआरएफ और सिविल प्रशासन के कुल 150 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
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