Agra News : कौशल, कला और आत्मनिर्भरता का संगम, आंबेडकर विवि में कार्यशाला शुरू

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में छात्राओं को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक और पहल करते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस के गृह प्रबंधन विभाग द्वारा पिडिलाइट के सहयोग से तीन दिवसीय हस्तकला कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला 5 से 7 फरवरी तक आयोजित की जा रही है।

Inauguration of a three-day handicraft workshop at Ambedkar University Agra attended by faculty and students

कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान की डीन प्रो. अर्चना सिंह ने किया। उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ छात्राओं की रचनात्मक क्षमता को विकसित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

Students learning clay modeling and handicraft techniques during a workshop at Ambedkar University Agra

कार्यशाला के प्रथम दिवस छात्राओं को मोल्डेड क्ले से ‘दा ट्रियो डॉल’ (गुड़िया), लीफ वॉल हैंगिंग तथा कैनवास की सहायता से आकर्षक और ट्रेंडी चूड़ियाँ बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। पिडिलाइट से आए विशेषज्ञ नरेंद्र सोलंकी ने सामग्री के सही उपयोग, आधुनिक डिज़ाइन तकनीकों और बेहतर फिनिशिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

Pidilite expert Narendra Solanki demonstrating handicraft techniques to students at Ambedkar University Agra

नरेंद्र सोलंकी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हस्तकला अब केवल शौक तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह स्वरोज़गार का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। गुणवत्ता और नवाचार के साथ किया गया कार्य घर बैठे भी आय का सशक्त साधन बन सकता है।

कार्यशाला संयोजक डॉ. प्रीति यादव ने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं में रचनात्मक सोच विकसित करना और उन्हें रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि आगामी दो दिनों में भी हस्तकला से जुड़ी विभिन्न आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण सत्र में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में संस्थान की शिक्षिकाएँ और कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

कुलपति प्रो. आशु रानी ने इस पहल के लिए आयोजक शिक्षकों और छात्राओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे कौशल विकास आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने छात्राओं से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

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