आगरा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी का आयोजन। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में पालीवाल पार्क परिसर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ द्वारा बुधवार 11 फरवरी 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ परिसर में स्थापित पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया।

कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता आर.बी.एस. कॉलेज के प्रो. अरुण कुमार राघव ने कहा कि नैतिकता के आधार पर ही समाज एवं राष्ट्र का वास्तविक उत्थान संभव है। उन्होंने एकात्म मानववाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बुद्धि, शरीर और आत्मा का समग्र विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी विचारक को सही रूप में समझने के लिए उसके समय और परिस्थितियों को जानना आवश्यक होता है, तभी उसके विचारों की उपयोगिता का सही मूल्यांकन किया जा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान की डॉ. राधिका गोयल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके अनुसार राष्ट्र एक जीवंत सांस्कृतिक सत्ता है। उन्होंने अंत्योदय की अवधारणा, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के महत्व को भी रेखांकित किया।
संस्थान की नम्रता तोमर ने विद्यार्थियों के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। वहीं डॉ. आभा सिंह ने पंडित जी के एकात्म दर्शन को भूगोल और दर्शन से जोड़ते हुए बताया कि सीमित संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग आवश्यक है तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना वर्तमान समय की मांग है।
गोष्ठी के अंतिम सत्र में संस्थान के डॉ. आयुष मंगल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को समझने पर ‘जियो और जीने दो’ तथा ‘जो कमाएगा वह खाएगा’ जैसी प्रचलित उक्तियों का सही स्वरूप ‘जीने दो और जियो’ तथा ‘जो कमाएगा वह खिलाएगा’ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति केवल अपने लिए कमाता है तो संसाधनों के शोषण की प्रवृत्ति बढ़ती है, जबकि दूसरों को साथ लेकर चलने की भावना समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में व्यावहारिक और सामाजिक ज्ञान का विशेष महत्व है तथा साहस और सार्थक जीवन मूल्यों को अपनाना आवश्यक है।
गोष्ठी का संचालन डॉ. तपस्या चौहान ने किया। इस अवसर पर डॉ. रत्ना पाण्डे, डॉ. भारत सिंह, डॉ. नीरज कुशवाह, माधुरी कौशिक, इति गोस्वामी, डॉ. प्राची अग्रवाल, आयुष कुमार शुक्ला, हीरेश कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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