Agra News : विश्व रेडियो दिवस 2026 पर आगरा की आवाज के साथ नवाचार और प्रेरणा का अनुभव

आगरा। विश्व रेडियो दिवस 2026 के अवसर पर डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा में “आगरा की आवाज” ने नवाचारपूर्ण और प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस वर्ष के आयोजन का विषय था नई सोच का रेडियो: एआई, आरजे और डिजिटल भविष्य” (Radio Reimagined: AI, RJs & the Digital Future)। यह कार्यक्रम माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी के कुशल संरक्षण एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

Students and speakers at World Radio Day 2026 seminar at Agra University organized by Agra Ki Awaaz.

कार्यक्रम की थीम – “जहाँ तकनीक और प्रतिभा मिलती है, जहाँ एआई रेडियो तरंगों को सशक्त बनाता है, जहाँ आउटरीच समाज से जुड़ाव में मदद करता है” – ने स्पष्ट किया कि भविष्य का रेडियो केवल आवाज नहीं, बल्कि तकनीक, प्रतिभा और समाज के बीच सेतु का कार्य करेगा।

AI technology demonstration at World Radio Day 2026 seminar at Agra University.

एआई और तकनीक से सशक्त होता रेडियो
एआई टेक एक्सपर्ट इंजीनियर तरुण श्रीवास्तव ने अपने वक्तव्य में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज रेडियो प्रसारण को नई दिशा दे रहा है।

Students participating in “OPD on Wheels” outreach activity organized by Agra Ki Awaaz.

उन्होंने समझाया कि कैसे एआई आधारित ऑटोमेशन, वॉइस क्लोनिंग, कंटेंट एनालिटिक्स और श्रोता व्यवहार विश्लेषण रेडियो को अधिक प्रभावी और इंटरैक्टिव बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “एआई रेडियो की जगह नहीं लेगा, बल्कि आरजे की प्रतिभा को और निखारेगा। यह तकनीक को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का माध्यम है।”

लोकप्रिय आरजे का अनुभव: आवाज जो दिल से जुड़ती है
Radio City 91.9 FM Agra के लोकप्रिय आरजे पंचायती राज ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि डिजिटल युग में भी श्रोताओं से भावनात्मक जुड़ाव ही रेडियो की असली ताकत है। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “रेडियो सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ना नहीं है, यह लोगों की भावनाओं को समझना और समाज की नब्ज पकड़ना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ रेडियो की पहुंच और भी व्यापक हुई है।”

सामुदायिक रेडियो: समाज से सीधा संवाद
सामुदायिक रेडियो विशेषज्ञ एवं जनसंपर्क अधिकारी पूजा सक्सेना ने बताया कि सामुदायिक रेडियो ग्रामीण और शहरी समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है। उन्होंने इस अवधारणा को विस्तार देते हुए कहा कि जब रेडियो समाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं और उपलब्धियों को आवाज देता है, तभी वह वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनता है। उन्होंने विशेष रूप से “ओपीडी ऑन व्हील्स” जैसी आउटरीच गतिविधियों का उल्लेख किया, जिसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका रही।

विद्यार्थियों का सम्मान: सेवा और समर्पण की सराहना
कार्यक्रम में फार्मेसी विभाग के छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आउटरीच गतिविधि “ओपीडी ऑन व्हील्स” में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें सामुदायिक रेडियो की ओर से प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। छात्रों ने विशेषज्ञों से उत्सुकता पूर्वक सवाल जवाब भी किया।

रेडियो निदेशक प्रो. अर्चना सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व रेडियो दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने कहा, “रेडियो अब पारंपरिक माध्यम नहीं रहा; यह डिजिटल प्लेटफॉर्म, पॉडकास्ट, एआई और सोशल मीडिया के साथ मिलकर नई संभावनाओं का संसार बना रहा। हमारा लक्ष्य है कि ‘आगरा की आवाज’ विश्वविद्यालय की विशिष्ट पहचान बने।”

कुलपति का प्रेरक मार्गदर्शन
माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में आयोजित इस सेमिनार ने यह संदेश दिया कि जब तकनीक और प्रतिभा का संगम होता है, तब रेडियो केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का उपकरण बन जाता है।

विश्व रेडियो दिवस 2026 पर “आगरा की आवाज” ने यह सिद्ध किया कि सामुदायिक रेडियो नई सोच, नवाचार और सामाजिक जुड़ाव के साथ भविष्य की ओर अग्रसर है। यह आयोजन न केवल तकनीक और प्रतिभा का उत्सव था, बल्कि युवाओं के सपनों और समाज की आवाज को सशक्त बनाने का संकल्प भी प्रस्तुत किया।

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