फतेहपुर सीकरी। आज रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार से अपील की। फतेहपुर सीकरी की अरावली पहाड़ियों पर प्राचीन दुर्लभ शैलचित्र (रॉक पेंटिंग्स) स्थित हैं, जो खनन और वन कटाई बढ़ने पर हमेशा के लिए नष्ट हो सकते हैं। सदस्यों ने चेतावनी दी कि अगर संरक्षण कमजोर हुआ, तो दिल्ली-एनसीआर का AQI और प्रदूषण और बिगड़ेगा, भूजल स्तर गिरेगा, स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी और लोगों का पलायन हो सकता है।
आज फतेहपुर सीकरी में रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा पर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि फतेहपुर सीकरी में स्थित प्राचीनतम दुर्लभ शैलचित्र खनन गतिविधियों से स्थायी रूप से नष्ट हो सकते हैं।
पर्यावरणविदों ने आगाह किया कि अगर यहां खनन और वन कटाई बढ़ी, तो PM10 और PM2.5 प्रदूषक कणों में तेज वृद्धि होगी, जिससे पहले से खराब AQI और बिगड़ेगा। अध्ययनों के अनुसार, अरावली के नंगे हिस्सों से उड़ने वाली धूल सर्दियों की स्मॉग में बड़ा योगदान देती है। दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही प्रदूषण की समस्या गंभीर है, और यह फैसला इसे और जटिल बना सकता है।
कोर्ट के अनुसार, भूमि को वन घोषित करने का निर्णय केवल राजस्व रिकॉर्ड और भौतिक स्थिति के आधार पर होगा, न कि सिर्फ ऊंचाई के आधार पर। हरियाणा में केवल दो चोटियां 100 मीटर से ऊपर हैं – तोसाम (भिवानी जिला) और मधोपुरा (महेंद्रगढ़ जिला)। अन्य क्षेत्र अब संरक्षण से बाहर हो सकते हैं, जिससे पूरे इकोसिस्टम को खतरा है।
सदस्यों ने बताया कि अरावली थार मरुस्थल की धूल को रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है और जैव विविधता बनाए रखती है। संरक्षण कमजोर होने पर:
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धूल और प्रदूषण बढ़ेगा
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भूजल स्तर घटेगा, बोरवेल सूखेंगे
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गर्मी अधिक तीव्र होगी
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स्वास्थ्य समस्याएं (सांस की बीमारियां) बढ़ेंगी
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लोगों का पलायन हो सकता है
इस अवसर पर डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, महंत नंदन श्रोत्रिय, चतुर्भुज तिवारी, मुकेश चौधरी, दिनेश शर्मा, शरद शर्मा, भगवान सिंह, सोहनलाल आदि उपस्थित रहे। सदस्यों ने सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार से अनुरोध किया कि यह प्रलयंकारी निर्णय तुरंत वापस लिया जाए और अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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