आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और रूस के एम.जी.आई.एम.ओ. विश्वविद्यालय (MGIMO University, Moscow) के स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत आए रूसी छात्रों के चौथे बैच के तीन महीने के पाठ्यक्रम का शुक्रवार को के.एम.आई. (विदेशी भाषा विभाग) में समापन हुआ। छात्रों को कुलपति प्रो. आशु रानी द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में छात्रों ने हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति, इतिहास और साहित्य का गहन अध्ययन किया। यह स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम दोनों विश्वविद्यालयों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार संचालित हो रहा है। अब तक चार छात्र दल आगरा आ चुके हैं, जबकि पांचवां फरवरी में आने का प्रस्तावित है। इसके अलावा, विदेशी भाषा विभाग से दो छात्रों का दल रूस जा चुका है और तीसरा दल शीघ्र प्रस्थान करेगा।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को निरंतर सशक्त बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करता है और विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करता है।
विद्यापीठ के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय सहयोग में निरंतर प्रगति कर रहा है। हाल ही में उज़्बेक स्टेट यूनिवर्सिटी, ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) के साथ समझौता ज्ञापन हुआ है। विश्वविद्यालय ऑक्सफोर्ड, लंदन, फ्रांस और ऑस्ट्रिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के संपर्क में भी है।
विदेशी भाषा विभाग के समन्वयक डॉ. प्रदीप वर्मा और रूसी भाषा शिक्षक अनुज गर्ग के मार्गदर्शन में स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम का संचालन किया गया। फरवरी में एम.जी.आई.एम.ओ. विश्वविद्यालय से अगला छात्र दल आगरा आएगा। साथ ही हाल ही में रूसी दूतावास के सहयोग से दो रूसी शिक्षकों द्वारा 15 दिवसीय विशेष रूसी भाषा कक्षाओं का आयोजन भी किया गया।
पाठ्यक्रम के दौरान रूसी छात्रों को डॉ. मोहिनी दयाल, डॉ. रमा, डॉ. रूपा, डॉ. तपस्या चौहान और डॉ. शीरीन ज़ैदी ने हिंदी भाषा, साहित्य, इतिहास और संस्कृति पर व्याख्यान दिए। समापन समारोह में विदेशी भाषा विभाग के अन्य शिक्षक डॉ. आदित्य प्रकाश, विशाल शर्मा, अंगद, डॉ. कृष्ण कुमार और डॉ. संदीप सिंह भी उपस्थित रहे।
रूसी छात्रों के अनुभव:
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अलीना कोलेगोवा: भारत की संस्कृति, खान-पान और लोग बहुत अच्छे हैं। हिंदी सीखकर भारत में काम करना चाहती हूं।
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अन्द्रैय पास्तूखोफ़: यहां अध्ययन का अनुभव अद्भुत रहा। नए मित्र बने और शिक्षकों ने बहुत सहयोग किया।
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येलिसैय गूश्चिन: तीन महीने का अध्ययन अनुभव शानदार रहा। सभी शिक्षकों का सहयोग मिला।
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अर्सेनी एमिलियानोव: हिंदी के मूलभाषी शिक्षकों से पढ़ना विशेष अनुभव रहा, जीवनभर याद रहेगा।
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मारिया मालिशेवा: यह अध्ययन सफर ज्ञानवर्धक और रोचक रहा। शिक्षकों ने सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
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