Agra News : आरटीई के तहत आगरा में गरीब और वंचित बच्चों को मिलेगा निजी स्कूल में शत-प्रतिशत प्रवेश

आगरा। गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की पढ़ाई का सपना साकार करने के लिए शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 के तहत जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आरटीई के तहत सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर समीक्षा की गई।

District Magistrate Arvind Mallappa Bangari chairing a review meeting on RTE Act 2009 for free admission of poor children in private schools in Agra

बैठक में बताया गया कि आरटीई अधिनियम के अंतर्गत निजी व गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में शुरू की जाएगी। प्रथम चरण के आवेदन 02 फरवरी से 16 फरवरी 2026 तक लिए जाएंगे। सत्यापन की अंतिम तिथि 16 फरवरी होगी और 18 फरवरी को लॉटरी संपन्न कराई जाएगी। द्वितीय चरण में आवेदन 21 फरवरी से 07 मार्च तक, सत्यापन 07 मार्च और लॉटरी 09 मार्च को होगी। तृतीय चरण के आवेदन 12 मार्च से 25 मार्च तक लिए जाएंगे, सत्यापन की अंतिम तिथि 25 मार्च तथा लॉटरी 27 मार्च को कराई जाएगी।

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए आरटीई के अंतर्गत प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पात्र बच्चों को निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी, जिसकी समय-सारिणी जारी कर दी गई है। लॉटरी के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालयों को आवंटन के अनुसार नामांकन के आदेश जारी किए जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले जिले के सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं की कुल सीटों का कम से कम 25 प्रतिशत के आधार पर शत-प्रतिशत मैपिंग और रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। साथ ही प्रत्येक विकास खंड में नामांकन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आरटीई के तहत पात्र बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश हर हाल में सुनिश्चित कराया जाए। यदि कोई निजी या प्राइवेट स्कूल आवंटित बच्चे को प्रवेश देने से मना करता है, तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर मान्यता रद्द करने की संस्तुति भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि यदि कोई अभिभावक फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से प्रवेश कराने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद स्कूलों को बच्चों का विवरण आरटीई ऑनलाइन पोर्टल और यू-डाइस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा। इसके साथ ही निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा निर्धारित मानकों से अधिक शुल्क वसूली, हर वर्ष ड्रेस बदलने, अनावश्यक ब्रांडिंग सामग्री का बोझ अभिभावकों और बच्चों पर डालने जैसी शिकायतों पर सख्ती से रोक लगाने और लगातार निगरानी रखने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए।

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