Agra News: आगरा में जियोप्रोम्पटिंग पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में बुधवार को जियोप्रोम्पटिंग विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। यह  कार्यशाला 5 से 7 फरवरी तक आयोजित की जा रही है

Students and dignitaries at the inauguration of the Geoprompting international workshop at Dr. Bhimrao Ambedkar University, Agra

जिसका आयोजन विश्वविद्यालय के के.एम.आई. में संचालित विदेशी भाषा विभाग द्वारा किया गया है। इसका उद्देश्य भाषा शिक्षण को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आधुनिक तकनीक और वैश्विक शैक्षिक दृष्टिकोण से जोड़कर विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करना है।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आशु रानी ने की। कार्यक्रम में के.एम.आई. के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर, आई.ई.टी. निदेशक प्रो. मनु प्रताप सिंह, फ्रांस से आए एआई विशेषज्ञ प्रो. निकोला मर्तिन तथा अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त एआई विशेषज्ञ और शोधकर्ता डॉ. अरुण कुमार शांतालिंगम मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

यह अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला एसोसिएशन ऑफ इंडियन फ्रेंच प्रोफेशनल्स एंड रिसर्चर्स, इंटरनेशनल फ्रेंचोफोनिक इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इन AI, न्यूरोपेडागोलॉजी एंड डिडैक्टिक्स (IFRINA) और एसोसिएशन ऑफ एक्सपर्ट्स एंड इवेल्यूटर्स इन द फील्ड ऑफ ह्यूमन एंड AI (EVAL) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। यह आयोजन भाषा, तकनीक और नवाचार के संगम का उत्कृष्ट उदाहरण है।

Workshop participants learning AI-based tools and digital platforms for language teaching at Agra University

कुलपति प्रो. आशु रानी ने उद्घाटन सत्र में कहा कि आज का समय केवल ज्ञान अर्जन का नहीं है, बल्कि ज्ञान सृजन और उसके नवाचारी उपयोग का है। उन्होंने बताया कि जियोप्रोम्पटिंग भाषा शिक्षण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, विषय विशेष की सटीक, संदर्भ-आधारित और व्यावहारिक जानकारी प्रदान करके विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकती है।

के.एम.आई. निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, स्थान और मानवीय अनुभवों की अभिव्यक्ति है। जियोप्रोम्पटिंग भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

फ्रांस से आए अतिथि प्रो. निकोला मर्तिन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भाषा शिक्षण की पारंपरिक सीमाओं को बढ़ा रही है। जियोप्रोम्पटिंग जैसी अवधारणाएं शिक्षण को स्थानीय और भौगोलिक संदर्भों से जोड़कर अधिक अर्थपूर्ण बनाती हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. अरुण कुमार शांतालिंगम ने कहा कि जियोप्रोम्पटिंग एक उभरती हुई शैक्षणिक अवधारणा है, जिसमें भूगोल, स्थानिक संदर्भ और एआई के माध्यम से भाषा शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाया जाता है। कार्यशाला में प्रतिभागियों को एआई आधारित टूल्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और डेटा-आधारित शिक्षण पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आई.ई.टी. निदेशक प्रो. मनु प्रताप सिंह ने कहा कि भविष्य की शिक्षा अंतःविषयी होगी, जिसमें भाषा, तकनीक और सामाजिक-भौगोलिक संदर्भ एक-दूसरे से जुड़े होंगे। जियोप्रोम्पटिंग इसी दृष्टि को साकार करती है।

कार्यशाला के संयोजक एवं विदेशी भाषा विभाग समन्वयक डॉ. प्रदीप वर्मा ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य भाषा शिक्षण को तकनीक-संवेदनशील, अनुभवात्मक और व्यावहारिक बनाना है। जियोप्रोम्पटिंग भाषा, स्थान और तकनीक को जोड़कर विद्यार्थियों को अपने परिवेश और वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करती है।

इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों से 50 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जिनमें प्राध्यापक, शोधार्थी, भाषा विशेषज्ञ, शिक्षक प्रशिक्षक और विद्यार्थी शामिल हैं। बहुराष्ट्रीय सहभागिता के कारण यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए वैश्विक सीख, नवाचार और प्रेरणा का सशक्त मंच बनकर उभर रही है।

उद्घाटन अवसर पर कुलपति सहित सभी मंचासीन अतिथियों ने कार्यशाला की स्मारिका (सोवेनियर) का विमोचन किया। धन्यवाद ज्ञापन रूसी भाषा शिक्षक अनुज गर्ग ने दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धन का अवसर है, बल्कि उन्हें भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए आत्मविश्वास, नवाचार और तकनीकी दक्षता से सुसज्जित करने की दिशा में प्रेरक कदम भी है।

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