आगरा। जिले के खंदौली ब्लॉक अंतर्गत नेकपुर गांव में मंदिर निर्माण कार्य के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब निर्माण स्थल पर रखे ईंटों के ढेर के भीतर बड़े-बड़े सांप दिखाई दिए। सांपों को देखकर मौके पर मौजूद मजदूरों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ देर के लिए काम भी रोकना पड़ा।
ग्रामीणों के अनुसार, ईंटें हटाते समय सांपों की हलचल नजर आई, जिससे किसी अनहोनी की आशंका बढ़ गई। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने संयम दिखाया और तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस की आपातकालीन हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर सूचना दी।
सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट की दो सदस्यीय प्रशिक्षित टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंची। टीम ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान शुरू किया और ईंटों के ढेर के भीतर छिपे सभी सात सांपों को सुरक्षित बाहर निकाला।
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बचाए गए सभी सांप भारतीय रैट स्नेक (ओरिएंटल रैट स्नेक) पाए गए, जो कि गैर-विषैली प्रजाति है। रेस्क्यू के दौरान न तो किसी ग्रामीण को कोई नुकसान हुआ और न ही किसी सांप को चोट पहुंची। सभी सांपों को कुछ समय तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने पर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि तेजी से हो रहे निर्माण कार्य और शहरीकरण के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता और समय पर विशेषज्ञों की मदद से बड़े हादसों को रोका जा सकता है।
वहीं संस्था के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने कहा कि रैट स्नेक चूहों की आबादी नियंत्रित कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन कोबरा जैसी आकृति होने के कारण अक्सर इन्हें गलतफहमी में मार दिया जाता है। इस रेस्क्यू को ग्रामीणों की समझदारी और सह-अस्तित्व की सोच का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।
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