Agra News : मिशन शक्ति 5.0 के तहत डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम

 आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के पर्यटन एवं होटल प्रबंधन संस्थान द्वारा मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “एंपावर्ड वूमेन, एंपावर्ड वर्ल्ड” रहा। कार्यक्रम में संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों से जुड़े लगभग 80 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और महिला सशक्तिकरण से जुड़े सामाजिक, आर्थिक व वैचारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

Women Empowerment Workshop under Mission Shakti 5.0 at DBRAU Agra

कार्यशाला का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर कला संकाय की अधिष्ठाता प्रोफेसर हेमा पाठक, समाजशास्त्र की वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. आभा मिश्रा (भगवती देवी जैन कन्या महाविद्यालय), पर्यटन एवं होटल प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर यू.एन. शुक्ला तथा होटल प्रबंधन विभाग के प्रवक्ता अमित कुमार साहू मंचासीन रहे।

Students participating in Women Empowerment Workshop at DBRAU Agra

मुख्य अतिथि प्रोफेसर हेमा पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं का सर्वांगीण विकास ही किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार होता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी होती हैं, तभी परिवार, समाज और देश सशक्त बनता है। महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक मजबूती की प्रक्रिया है, जिसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों की समान सहभागिता आवश्यक है।

Key speakers addressing Women Empowerment at DBRAU Agra

मुख्य वक्ता डॉ. आभा मिश्रा ने मिशन शक्ति 5.0 की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कार्यक्रम महिलाओं के उत्थान के लिए सामर्थ्य और स्वावलंबन जैसे दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं—कौशल विकास कार्यक्रम, स्वयं सहायता समूह, महिला सुरक्षा से जुड़ी पुलिस पहल, स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं तथा सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का सही उपयोग कर महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि एक विकसित, सुरक्षित और स्थायी समाज के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर यू.एन. शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति अत्यंत सशक्त और सम्मानजनक थी। उन्होंने वैदिक काल से लेकर मध्यकाल तक के सामाजिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए बताया कि विदेशी आक्रांताओं के आगमन के बाद असुरक्षित परिस्थितियों के कारण महिलाओं की सामाजिक भूमिका सीमित होती चली गई। उन्होंने जौहर और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं के कारणों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि ऐसी नकारात्मक सोच ने समाज को लंबे समय तक पीछे धकेला। उन्होंने आह्वान किया कि आने वाली पीढ़ियों को इन कुप्रथाओं और भेदभावपूर्ण मानसिकता से दूर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। आज की महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, व्यवसाय और परिवार सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और सशक्त महिलाएं ही समृद्ध राष्ट्र और सशक्त विश्व की नींव हैं।

कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रवक्ता अमित कुमार साहू ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ समाज का सशक्तिकरण भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब समाज महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करता है, तभी वास्तविक विकास संभव होता है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

कार्यशाला का संचालन संस्थान की शिक्षिका साक्षी तिवारी ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विभा माथुर, डॉ. अपर्णा एवं रंजीत जी का विशेष सहयोग रहा। वहीं कार्यालयी व्यवस्थाओं को कुलदीप यादव, नितिन, कुलदीप दीक्षित, विशाल, अलविना, पवन और रजनी ने कुशलतापूर्वक संभाला। कार्यशाला के अंत में विद्यार्थियों ने महिला सशक्तिकरण को लेकर अपने विचार साझा किए और ऐसे कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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