Agra News : बसंत पंचमी पर आगरा में सारंग फाउंडेशन का शुभारंभ, सरस्वती पूजन और भव्य कवि सम्मेलन

आगरा। बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर शुक्रवार को सिकंदरा–बोदला रोड स्थित द नंबरदार्स बैंक्विट हॉल में सरस्वती पूजन, कवि सम्मेलन एवं साहित्यकारों के सम्मान समारोह के साथ साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक प्रकल्पों को समर्पित सारंग फाउंडेशन का गरिमामयी शुभारंभ किया गया।

Sarng Foundation inauguration in Agra with Saraswati Puja on Basant Panchami

मुख्य अतिथि महापौर हेमलता दिवाकर रहीं, जबकि समारोह की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि सोम ठाकुर ने की। विशिष्ट अतिथियों में मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी, संस्कार भारती के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य बाँकेलाल गौड़, दीनदयाल धाम के निदेशक सोनपाल, फाउंडेशन के संरक्षक शिवराज शर्मा शास्त्री, तपन ग्रुप के चेयरमैन व समाजसेवी सुरेश चंद्र गर्ग, सरस्वती विद्या मंदिर दीनदयाल धाम के प्रबंधक नरेंद्र पाठक और सारंग फाउंडेशन के अध्यक्ष व ओज के सशक्त कवि सचिन दीक्षित शामिल रहे। अतिथियों ने माँ शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

Grand Kavi Sammelan during Sarng Foundation launch in Agra

समारोह में मंचासीन अतिथियों द्वारा शायर दीपांशु शम्स को सारंग युवा सम्मान–2026 से सम्मानित किया गया। साथ ही सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा, रामेंद्र शर्मा रवि, संजय गुप्त, राकेश निर्मल, नूतन अग्रवाल, अलका अग्रवाल, सागर गुजराती, दीक्षा रिसाल, हरेंद्र शर्मा, मुकुल, रंजन मिश्र और प्रिया शुक्ला सहित कुल 12 कवि-साहित्यकारों को सारंग सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन कवि पदम गौतम ने किया।

Shayar Deepanshu Shams receiving Sarng Yuva Samman 2026 in Agra

इससे पूर्व कवि सम्मेलन का शुभारंभ सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी की सरस्वती वंदना से हुआ— “कमलासिनी सुनो यह मनभावना हमारी, स्वीकार आज कर लो नीराजना हमारी…”
कार्यक्रम संयोजक सचिन दीक्षित की पंक्तियों— “भारत माता घायल है, पहले उपचार जरूरी है…” ने श्रोताओं में जोश भर दिया।

सारंग युवा सम्मान से सम्मानित शायर दीपांशु शम्स के शेर— “हमेशा झुकने से कद ओहदे का और बढ़ता है, बड़ों के पाँव छूने से कभी इज्जत नहीं जाती…” पर सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। हास्य कवि पवन आगरी के व्यंग्य— “भैया! यह स्वतंत्र भारत है, यहाँ खाने की सबमें आदत है…” को भी खूब सराहना मिली।

पहली बार मंच से काव्य पाठ कर रहे एडवोकेट अशोक चौबे की पंक्तियाँ— “देवी हैं, देवी हैं नारियाँ… खिलौना नहीं…” श्रोताओं की चेतना को झकझोर गईं। संचालन कर रहे कवि पदम गौतम की रचना— “माँ के आँचल सा बिछोना हो नहीं सकता…” ने भावुक कर दिया।

कवि शशांक प्रभाकर की पंक्तियाँ— “खुशबुओं के लिए राजा ने कुछ गुलाबों की भी गर्दन उतार डाली है…” पर भी तालियाँ बजीं। एटा से आए कवि आर्य राजेश यादव ने— “अब तो हमारे ब्रज धाम की बारी है…” कहकर माहौल बाँध दिया।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए गीत ऋषि सोम ठाकुर ने अपने गीतों से समारोह को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में जितेंद्र फौजदार, ब्रजकिशोर, पूर्व पार्षद अमित ग्वाला, पूर्व विधायक महेश गोयल, पार्षद गौरव शर्मा, प्रतिभा जिंदल सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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